सुख का आनंद लो, लेकिन सुख के गुलाम मत बनो
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक केवल पढ़ने के लिए नहीं है, यह जीने की कला...
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः ।वीतरागभयक्रोधः स्थितधीर्मुनिरुच्यते ॥ श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक केवल पढ़ने के लिए नहीं है, यह जीने की कला...
महाभारत को हम अक्सर एक महान युद्ध की कहानी के रूप में देखते हैं—पांडव और कौरव, धर्म और अधर्म, हस्तिनापुर...
कुछ तारीख़ें कैलेंडर में नहीं, दिल में लिखी जाती हैं। 25 दिसंबर… मेरे लिए ऐसी ही एक तारीख़ है। उस...
"कभी-कभी इंसान किसी के जाने से नहीं टूटता… वह तब टूटता है, जब वही इंसान उसे उसकी औकात बता देता...
जब इंसान भीतर से पूरी तरह टूट जाता है, जब चारों ओर लोगों की भीड़ होने के बावजूद वह खुद...
यह कहानी शुरू होती है... साल 2022 से। साल 2022... ज़िंदगी अपनी रफ्तार से भाग रही थी। हर सुबह जिम्मेदारियों...
आसमान में चाँद था, लेकिन उसकी रोशनी से ज़्यादा चमक एक बूढ़े गुरु की आँखों में थी। उनके सामने उनका...
माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह?(कविता )ज्योति स्वामी, बीकानेर, राजस्थान माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह,स्वतंत्रता सूं हमेशा भलो नीं...
"कभी-कभी रिश्ते खत्म नहीं होते… बस एक इंसान उन्हें निभाता रहता है और दूसरा उन्हें छोड़ देता है।" कहते हैं...
देह पर नेह की शेष कुछ तो निशानी होती है।पारिजात से सुन्दर मेरे पिया, देह परनेह की शेष कुछ तो...