दो घड़ियों वाली लड़की…

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कुछ तारीख़ें कैलेंडर में नहीं, दिल में लिखी जाती हैं।

25 दिसंबर… मेरे लिए ऐसी ही एक तारीख़ है।

उस दिन जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा था, तब नहीं जानता था कि मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत रिश्ता मेरे सामने खड़ा है।

तुम्हारी कलाई पर दो घड़ियाँ थीं…

और मैं बस उन्हें देखकर मुस्कुरा दिया था।

मुझे क्या पता था कि उन दो घड़ियों से कहीं ज़्यादा कीमती वो इंसान है, जो उन्हें पहने हुए था।

उस दिन हमारी मुलाक़ात हुई…

कुछ बातें हुईं…

और ज़िंदगी अपने रास्ते चलती रही।

लेकिन शायद ऊपरवाले ने उसी दिन हमारी कहानी लिख दी थी।

धीरे-धीरे बातें बढ़ीं…

फिर आदत बन गईं…

और कब आदत, अपनापन बन गई…

पता ही नहीं चला।

आज हाल ये है कि तुम्हें कुछ बताना नहीं पड़ता।

मेरी हँसी के पीछे छिपी उदासी…

और मेरी खामोशी में दबे हुए हज़ार सवाल…

तुम बिना पूछे पढ़ लेती हो।

दुनिया कहती है कि किसी इंसान को समझने के लिए बहुत बातें करनी पड़ती हैं…

लेकिन शायद उन्होंने कभी सच्ची दोस्ती नहीं देखी।

क्योंकि सच्चे दोस्त शब्द नहीं सुनते…

धड़कनों की आवाज़ सुनते हैं।

तुम्हें पता है…

कई बार मैं जानबूझकर कह देता हूँ—

“मैं बिल्कुल ठीक हूँ…”

और तुम बिना एक पल गंवाए कह देती हो—

“झूठ मत बोलो… “

उस पल मुझे एहसास होता है कि दुनिया में मुझे पढ़ सकता है…

तुम जिद्दी हो…

बहुत जिद्दी।

कभी-कभी बिल्कुल एक छोटी बच्ची की तरह ।

रूठती भी हो…

गुस्सा भी करती हो…

लेकिन तुम्हारे उस गुस्से में भी अपनापन होता है।

तुम्हारी हर ज़िद मुझे इसलिए अच्छी लगती है…

क्योंकि उसके पीछे कोई अहंकार नहीं…

बस एक साफ़ और मासूम दिल है।

तुम्हारे अंदर मैंने एक ऐसा इंसान देखा है…

जो आजकल बहुत कम मिलता है।

एक ऐसी बेटी…

जिसे अपने माँ-बाप की इज़्ज़त सबसे प्यारी है।

एक ऐसी बहन…

जो अपने परिवार की मुस्कान के लिए खुद की खुशी भी भूल सकती है।

एक ऐसी दोस्त…

जो सामने वाले का दर्द अपना बना लेती है।

और सबसे बढ़कर…

एक ऐसा इंसान…

जिसके दिल में छल नहीं…

स्वार्थ नहीं…

दिखावा नहीं…

बस सच्चाई है।

आज की दुनिया में लोग रिश्ते निभाने से पहले फ़ायदा देखते हैं…

लेकिन तुमने मुझे सिखाया कि कुछ लोग बिना किसी मतलब के भी किसी की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन जाते हैं।

कई बार सोचता हूँ…

अगर उस दिन हमारी मुलाक़ात न हुई होती…

तो शायद मैं ज़िंदगी में बहुत कुछ पा लेता…

लेकिन एक ऐसा इंसान खो देता, जिसकी कमी शायद पूरी उम्र महसूस होती।

तुम मेरी ज़िंदगी का वो रिश्ता हो…

जिसे किसी नाम की ज़रूरत नहीं।

तुम्हें दोस्त कहना भी कभी-कभी कम लगता है…

क्योंकि दोस्ती से आगे भी कुछ रिश्ते होते हैं…

लेकिन दिल के सबसे क़रीब वही होते हैं।

मुझे नहीं पता आने वाले सालों में वक़्त हमें कहाँ ले जाएगा…

ज़िंदगी किस मोड़ पर खड़ा कर देगी…

और जब कोई मुझसे पूछेगा—

तो मैं मुस्कुराकर बस इतना कहूँगा—

“एक लड़की… जिसने पहली मुलाक़ात में दो घड़ियाँ पहन रखी थीं।
उस दिन मुझे लगा था कि वो सिर्फ़ वक़्त पहनती है…
लेकिन बाद में समझ आया कि उसने अनजाने में मेरा पूरा वक़्त, मेरी हर दुआ, मेरी हर मुस्कान और मेरी पूरी दोस्ती अपने नाम कर ली थी।”

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