जब कान्हा खुद चलकर दर्शन देने आए…
कल मंदिर में मेरे नन्हे से कान्हा के दर्शन हुए थे… पता नहीं क्यों, उन्हें देखते ही दिल भर आया।मन...
कल मंदिर में मेरे नन्हे से कान्हा के दर्शन हुए थे… पता नहीं क्यों, उन्हें देखते ही दिल भर आया।मन...
माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह?(कविता )ज्योति स्वामी, बीकानेर, राजस्थान माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह,स्वतंत्रता सूं हमेशा भलो नीं...
देह पर नेह की शेष कुछ तो निशानी होती है।पारिजात से सुन्दर मेरे पिया, देह परनेह की शेष कुछ तो...