मुझे रोना है… बस एक अपना कंधा चाहिए
कभी-कभी इंसान थक जाता है…लोगों से नहीं, खुद को मजबूत दिखाते-दिखाते। चेहरे पर मुस्कान होती है, होंठों पर सामान्य बातें...
कभी-कभी इंसान थक जाता है…लोगों से नहीं, खुद को मजबूत दिखाते-दिखाते। चेहरे पर मुस्कान होती है, होंठों पर सामान्य बातें...
पति-पत्नी के रिश्ते में बढ़ती खामोशी सिर्फ संवाद की कमी नहीं, रिश्ते के भीतर पैदा होती दूरी की कहानी है...
“जिस आँगन में बेटी की हँसी गूंजती है, वहाँ खुशियाँ सिर्फ आती नहीं, पीढ़ियों तक रहती हैं।” बेटी… यह शब्द...
जिस मन में सवाल जीवित रहते हैं, वही मन नई संभावनाओं को जन्म देता है “जिज्ञासा मनुष्य के विकास में...
रिश्ते केवल पति-पत्नी या परिवार तक सीमित नहीं होते। कुछ रिश्ते दोस्ती के होते हैं, जो खून के रिश्ते न...
हर इंसान अपनी जिंदगी में कुछ सपने देखता है।कुछ सपने अपने लिए होते हैं, कुछ अपने परिवार के लिए और...
मनुष्य की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसके पास जो होता है, उसकी कीमत अक्सर तब समझ आती है,...
जिंदगी की भागदौड़ में कहीं जिंदगी ही पीछे न छूट जाए आज का इंसान लगातार दौड़ रहा है। किसी को...
मेरे शुभचिंतक बहुत हैं…इतने कि मेरी हर परेशानी उन्हें दिखाई देती है,मेरी हर गलती पर सलाह देने वाले मिल जाते...
**“क्रोधाद्भवति संमोहः, संमोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो, बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥”** — श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 2, श्लोक 63 क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्यों है? मनुष्य...