मुझे रोना है… बस एक अपना कंधा चाहिए

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कभी-कभी इंसान थक जाता है…
लोगों से नहीं, खुद को मजबूत दिखाते-दिखाते।

चेहरे पर मुस्कान होती है, होंठों पर सामान्य बातें होती हैं, जिंदगी भी अपनी रफ्तार से चलती रहती है… लेकिन भीतर कहीं बहुत कुछ टूट रहा होता है।

ऐसे समय में इंसान को सलाह नहीं चाहिए होती।
उसे यह सुनने की जरूरत नहीं होती कि “सब ठीक हो जाएगा।”
उसे बस एक ऐसा कंधा चाहिए होता है, जिस पर सिर रखकर वह बिना कुछ कहे रो सके।

मुझे भी रोना है…

बहुत कुछ है जो कहना चाहता हूं, लेकिन शब्द साथ नहीं देते।
बहुत कुछ है जिसे भूलना चाहता हूं, लेकिन यादें पीछा नहीं छोड़तीं।
बहुत कुछ है जिसे दिल में दबाकर रखा है, क्योंकि हर किसी के सामने अपने आँसू दिखाना आसान नहीं होता।

इस मतलबी दुनिया में हर कोई अपने मतलब से रिश्ते निभाता दिखाई देता है।
जब तक हम हँसते हैं, लोग हमारे साथ हँसते हैं।
जब तक हम मजबूत रहते हैं, लोग हमारी मजबूती की तारीफ करते हैं।
लेकिन जिस दिन हम कहते हैं—“आज मैं टूट गया हूं…”
उस दिन अक्सर आसपास की भीड़ अचानक छोटी हो जाती है।

कितना अजीब है ना?

हमें किसी के दुख में शामिल होने के लिए बहुत बड़े शब्द चाहिए होते हैं, जबकि कभी-कभी सिर्फ एक हाथ कंधे पर रखना ही काफी होता है।

कभी किसी से यह मत पूछिए कि “तुम इतने परेशान क्यों हो?”
बस उसके पास बैठ जाइए।

क्योंकि हर दर्द की कहानी सुनाई नहीं जा सकती।

कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिन्हें इंसान शब्दों में नहीं, आँसुओं में बयान करता है।

कभी-कभी वह इसलिए नहीं रोता कि वह कमजोर है, बल्कि इसलिए रोता है क्योंकि उसने बहुत लंबे समय तक खुद को संभालकर रखा है।

और शायद मुझे भी आज किसी ऐसे ही कंधे की तलाश है…

एक ऐसा कंधा जो मेरा हो।

जिस पर सिर रखकर मैं अपने सारे सवाल छोड़ सकूं।
जहाँ मुझे मजबूत बनने का अभिनय न करना पड़े।
जहाँ मेरे आँसुओं का हिसाब न माँगा जाए।
जहाँ मुझे यह न कहा जाए कि “पुरुष रोते नहीं।”
जहाँ बस इतना कहा जाए—

“रो लो… मैं यहीं हूँ।”

कितनी बड़ी जरूरत है इंसान की—
एक ऐसा अपना, जिसके सामने वह बिखर सके।

क्योंकि दुनिया के सामने संभलकर चलना मजबूरी हो सकता है,
लेकिन किसी अपने के सामने रो लेना…
सुकून होता है।

शायद जिंदगी में सबसे अमीर वही इंसान है जिसके पास पैसा कम हो, लेकिन एक ऐसा कंधा जरूर हो जिसे वह अपना कह सके।

और अगर आपके जीवन में ऐसा कोई व्यक्ति है, तो उसे संभालकर रखिए।

क्योंकि इस मतलबी दुनिया में बहुत लोग आपके साथ हँसने के लिए मिल जाएंगे…

लेकिन जो आपके साथ रोने के लिए बैठ जाए,
वह सच में आपका अपना है।

मुझे रोना है…
बस कोई अपना कंधा दे दे।
कोई यह न पूछे कि दर्द कितना है…
बस इतना कह दे—
“रो लो, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

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