कर्म

डांडिया रास: माँ की आराधना या मनोरंजन की आड़ में मर्यादाओं का पतन?

जिस पर्व का उद्देश्य माँ शक्ति की आराधना करना था, क्या वह कहीं केवल दिखावे और मनोरंजन तक सीमित होता...

वक्त तय है, जगह तय है | जीवन, समय और कर्म का गहरा सत्य

जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि इंसान चाहे जितनी योजनाएँ बना ले, समय के आगे उसकी एक नहीं...

जिज्ञासा : मनुष्य के विकास की पहली सीढ़ी

जिस मन में सवाल जीवित रहते हैं, वही मन नई संभावनाओं को जन्म देता है “जिज्ञासा मनुष्य के विकास में...

एक दिन सब जीतकर मृत्यु से हार जाना है…

जिंदगी की भागदौड़ में कहीं जिंदगी ही पीछे न छूट जाए आज का इंसान लगातार दौड़ रहा है। किसी को...

क्रोध से विनाश तक

**“क्रोधाद्भवति संमोहः, संमोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो, बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥”** — श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 2, श्लोक 63 क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्यों है? मनुष्य...

जिसे अपने चरित्र पर भरोसा हो, उसे अफवाहों से डर नहीं लगता

हमारे पुराणों और पुरानी कहानियों में ऐसे अनगिनत उदाहरण मिलते हैं, जहाँ सच्चाई पर सवाल उठे, चरित्र पर आरोप लगे...

गंग नहर की धार में बहती महाराजा गंगा सिंह की दूरदृष्टि

महाराजा गंगा सिंह और गंग नहर : जब एक दूरदर्शी राजा ने रेगिस्तान की प्यास को हरियाली में बदलने का...