Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Apne Man Ki

Suno Apne Man ki

Apne Man Ki

Suno Apne Man ki

  • Home
  • Apne Man Ki…….
  • Home
  • Apne Man Ki…….
Subscribe
Close

Search

कर्म

रण छोड़ना कायरता नहीं, सही समय की रणनीति है

By Dev Narayan Chhangani
August 26, 2026 2 Min Read
0

हम अक्सर मान लेते हैं कि जो व्यक्ति मैदान छोड़कर पीछे हट गया, वह हार गया। लेकिन इतिहास और धर्म हमें सिखाते हैं कि हर बार पीछे हटना हार नहीं होता; कई बार पीछे हटना ही सबसे बड़ी रणनीति होती है।

इसका सबसे सुंदर उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण हैं।

श्रीकृष्ण का रण छोड़ना

जब कंस का वध करने के बाद श्रीकृष्ण मथुरा में रहने लगे, तब मगध के राजा जरासंध ने बार-बार मथुरा पर आक्रमण किया। श्रीकृष्ण और यादवों ने अनेक बार उसका सामना किया और उसे पराजित किया, लेकिन जरासंध बार-बार विशाल सेना लेकर मथुरा पर आ जाता था।

बाद में परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि श्रीकृष्ण ने समझ लिया कि यदि हर बार केवल युद्ध ही किया गया, तो मथुरा के सामान्य लोगों और यादवों को लगातार संकट में डालना उचित नहीं होगा।

तब श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़कर द्वारका को अपना केंद्र बनाया।

लोगों ने उन्हें “रणछोड़” कहा।

लेकिन श्रीकृष्ण ने रण छोड़ा था, युद्ध करने की क्षमता नहीं।

उन्होंने मैदान इसलिए नहीं छोड़ा कि वे डर गए थे, बल्कि इसलिए छोड़ा क्योंकि उन्हें अपने लोगों की सुरक्षा, भविष्य और बड़े उद्देश्य की चिंता थी।

यही श्रीकृष्ण की रणनीति थी—

“जहाँ युद्ध से केवल विनाश बढ़े, वहाँ बुद्धि से रास्ता बदलना भी विजय की ओर कदम होता है।”

बाद में वही श्रीकृष्ण महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथी बने और धर्म की स्थापना के लिए निर्णायक भूमिका निभाई।

इसलिए “रणछोड़” नाम श्रीकृष्ण की कमजोरी का प्रतीक नहीं, बल्कि उनकी दूरदृष्टि और रणनीति का प्रतीक बन गया।

आज के जीवन में इसका अर्थ

मान लीजिए कोई व्यक्ति आपके साथ लगातार विवाद करता है। आप जानते हैं कि उसके साथ बहस करने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। आपके पास दो रास्ते हैं—

पहला, हर बार जवाब देकर अपनी ऊर्जा और समय बर्बाद करना।

दूसरा, कुछ समय के लिए पीछे हटना, अपनी ऊर्जा बचाना और सही समय का इंतजार करना।

अगर आपने दूसरा रास्ता चुना, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कमजोर हैं।

आपने बस छोटी लड़ाई छोड़कर बड़ी जीत के लिए खुद को बचाया है।

श्रीकृष्ण हमें यही सिखाते हैं कि जीवन में केवल साहस ही जरूरी नहीं, सही समय पर सही निर्णय लेने की बुद्धि भी जरूरी है।

हर युद्ध लड़ना जरूरी नहीं होता।

हर विवाद में उतरना जरूरी नहीं होता।

हर व्यक्ति को जवाब देना जरूरी नहीं होता।

कभी-कभी एक कदम पीछे हटना ही आगे बढ़ने की सबसे बड़ी तैयारी होती है।

क्योंकि रण छोड़ देना और हार जाना—दो अलग-अलग बातें हैं।

श्रीकृष्ण ने रण छोड़ा था,
धर्म नहीं।

उन्होंने स्थान बदला था,
अपना उद्देश्य नहीं।

उन्होंने युद्ध टाला था,
विजय का संकल्प नहीं।

इसलिए अगर जिंदगी में कभी आपको किसी परिस्थिति से पीछे हटना पड़े, तो खुद को कमजोर मत समझिए।

हो सकता है आप हार नहीं रहे हों…

आप बस अपनी अगली बड़ी जीत के लिए खुद को तैयार कर रहे हों।

“एक लड़ाई छोड़ देना, पूरी जंग हार जाना नहीं होता।”

जय श्रीकृष्ण 🙏
जय रणछोड़ राय 🙏

Author

Dev Narayan Chhangani

Follow Me
Other Articles
Previous

प्रीत और प्रेत

Next

माँ ने कहा—मैं हूँ ना, चिंता किस बात की

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

1 0 7 8 7 8
Total Users : 107878
Powered By WPS Visitor Counter
Copyright 2026 — Apne Man Ki . All rights reserved. KD Infosys