Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Apne Man Ki

Suno Apne Man ki

Apne Man Ki

Suno Apne Man ki

  • Home
  • Apne Man Ki…….
  • Home
  • Apne Man Ki…….
Subscribe
Close

Search

Travel Dairy

माँ ने कहा—मैं हूँ ना, चिंता किस बात की

By Dev Narayan Chhangani
August 26, 2026 3 Min Read
1

कहते हैं ना…

“माँ के दरबार में कोई अपनी मर्जी से नहीं जाता,
जब माँ बुलाती हैं, तभी उनके चरणों तक पहुँच पाता है।”

बरसों से मन में एक इच्छा थी—
एक बार माँ आशापुरा के दर्शन करूँ, माँ के चरणों में बैठूँ, अपने मन की सारी बातें माँ से कहूँ।

लेकिन हर बार कुछ न कुछ ऐसा हुआ कि यात्रा टलती गई।

शायद माँ मुझे रोक रही थीं…

क्योंकि शायद वह समय अभी आया ही नहीं था।

फिर पिछले शुक्रवार को दिन में अचानक पता नहीं मन में क्या हुआ।

कोई योजना नहीं थी।
कोई तैयारी नहीं थी।
बस अचानक मन के अंदर से एक आवाज़ आई—

“चल… माँ के पास चलते हैं।”

उस आवाज़ को समझने में मैंने एक पल भी नहीं लगाया।

गाड़ी के लिए फोन किया और रात करीब 9 बजे घर से निकल पड़ा।

रास्ता लंबा था… रात गहरी थी… शरीर थका हुआ था… लेकिन मन में एक अजीब-सी शांति थी।

ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद नहीं जा रहा…

माँ मुझे अपने पास बुलाकर ले जा रही हैं।

सफर के दौरान न जाने कितनी बार मन में यही ख्याल आया—

“पता नहीं माँ के सामने पहुँचकर क्या कहूँगा…”

लेकिन जब अगले दिन शाम को कच्छ, गुजरात में माँ आशापुरा के मंदिर के दर्शन हुए, तो जैसे शब्द ही खत्म हो गए।

मंदिर दिखाई दिया…

और आँखें नम हो गईं।

जिस माँ के दर्शन की इच्छा वर्षों से मन में थी, आज वही माँ सामने थीं।

उस पल सफर की थकान कहाँ चली गई, पता ही नहीं चला।

ऐसा लगा जैसे मैं किसी मंदिर में नहीं पहुँचा हूँ…

जैसे बहुत दूर भटकने के बाद अपनी माँ की गोद में लौट आया हूँ।

मन में बहुत कुछ था।

दर्द था।
परेशानियाँ थीं।
कुछ ऐसे सवाल थे जिनके जवाब किसी इंसान के पास नहीं थे।

लेकिन माँ के सामने पहुँचते ही लगा कि अब कुछ कहने की जरूरत नहीं है।

माँ से क्या छिपाना?
माँ तो बिना कहे भी सब जानती हैं।

पहले मन में था कि थोड़ी देर रुकेंगे और फिर वापस निकल जाएंगे।

लेकिन शायद फिर से मेरी नहीं, माँ की इच्छा चल रही थी।

माँ ने जैसे रोक लिया…

मन ने कहा—

“आज रात यहीं रुकना है।”

और हम वहीं रुक गए।

अगली सुबह जब मंदिर पहुँचा तो मन में एक अलग ही भाव था।

माँ की प्रतिमा के सामने करीब 15 मिनट तक बैठा रहा।

उन 15 मिनटों में मैंने दुनिया को भूल दिया।

न कोई फोन…
न कोई बात…
न कोई इच्छा…

बस मैं था और माँ थीं।

मैंने माँ को अपनी हर पीड़ा बता दी।

वह दर्द भी, जिसे कभी किसी के सामने कह नहीं पाया।

वह परेशानी भी, जिसे मुस्कुराकर छिपाता रहा।

वह डर भी, जिसे दिल में दबाकर जीता रहा।

और फिर अचानक…

ऐसा लगा जैसे माँ मेरी ओर देखकर कह रही हों—

“इतना क्यों डरता है?
मैं हूँ ना…”

बस उस एक एहसास ने अंदर तक हिला दिया।

आँखों से आँसू निकल पड़े।

उस पल लगा कि दुनिया चाहे साथ दे या न दे…

माँ का हाथ सिर पर हो तो इंसान कभी अकेला नहीं होता।

माँ से मैंने कुछ माँगा नहीं।

बस इतना कहा—

“माँ, अब आप जानती हो मेरे मन में क्या है।
मुझे कुछ समझ नहीं आता तो कोई बात नहीं…
बस मेरा हाथ मत छोड़ना।”

माँ के दरबार से बाहर निकला तो वही रास्ते थे, वही जिंदगी थी, वही परेशानियाँ थीं…

लेकिन मैं वही इंसान नहीं था।

मेरे भीतर एक विश्वास आ चुका था।

कि अगर माँ ने बुलाया है,
तो वह यूँ ही नहीं बुलाया।

अगर माँ ने अपने दरबार तक पहुँचाया है,
तो आगे का रास्ता भी माँ ही बनाएगी।

कभी-कभी जिंदगी हमें बहुत थका देती है।

हम लोगों से उम्मीद करते-करते टूट जाते हैं।

हर दरवाजा खटखटाकर जब कोई जवाब नहीं मिलता, तब शायद ऊपर वाला हमें अपने दरबार में बुलाता है…

ताकि हम समझ सकें—

जिसे हम अकेलापन समझ रहे थे,
वहाँ भी माँ हमारे साथ थीं।

आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है…

बरसों से मैं माँ के दर्शन के लिए इंतजार नहीं कर रहा था।

असल में माँ मेरे उस दिन का इंतजार कर रही थीं,
जिस दिन मुझे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी।

और जिस दिन माँ ने बुलाया…

मैं रात 9 बजे घर से निकल पड़ा।

न कोई तैयारी…
न कोई योजना…
बस माँ का नाम लेकर।

क्योंकि…

माँ का बुलावा समय देखकर नहीं आता,
माँ का बुलावा किस्मत देखकर आता है।

और जब माँ बुलाती हैं…

तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।
थकान अपने आप मिट जाती है।
आँखें अपने आप नम हो जाती हैं।
और दिल बस इतना कहता है—

**“माँ… अब कहीं और जाने का मन नहीं है।

बस अपनी गोद में यूँ ही बनाए रखना।”** 🙏❤️

जय माँ आशापुरा।
जय माता दी। 🚩

Tags:

Ashapura MataAshapura Mata TempleDarshanDevotional StoryGujarat TemplesHindu TempleKutch GujaratMaa AshapuraMaa Ashapura TempleMatajiSpiritual JourneyTemple Yatra
Author

Dev Narayan Chhangani

Follow Me
Other Articles
Previous

रण छोड़ना कायरता नहीं, सही समय की रणनीति है

One Comment
  1. bhagyavati vyas says:
    August 27, 2026 at 12:25 am

    Ma to ma hoti h

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Our Visitor

1 0 7 8 7 5
Total Users : 107875
Powered By WPS Visitor Counter
Copyright 2026 — Apne Man Ki . All rights reserved. KD Infosys