फ्रेंडशिप बैंड चाहे कम हों, लेकिन राखियों से हाथ भरे होने चाहिए…
कलाई पर फ्रेंडशिप बैंड बाँधने वाले बहुत मिल जाते हैं…
लेकिन राखी बाँधने वाली बहनें हर किसी के नसीब में नहीं होतीं।
दोस्ती में रूठना आसान है,
मनाना आसान है,
और कभी-कभी रिश्ता खत्म करना भी आसान होता है…
लेकिन भाई-बहन का रिश्ता?
यह तो खून से लिखा वो रिश्ता है,
जिसे दूरियाँ मिटा नहीं सकतीं,
नाराज़गी तोड़ नहीं सकती
और वक्त खत्म नहीं कर सकता।
बचपन में जिस बहन से भाई लड़ता था,
जिसकी चोटी खींचकर भाग जाता था,
जिसकी मिठाई चुरा लेता था…
आज वही भाई बड़ा होकर सोचता है—
“काश… वो बचपन फिर से लौट आए।”
काश फिर वही घर हो…
वही आँगन हो…
वही छोटी-छोटी लड़ाइयाँ हों…
और माँ की वही आवाज आए—
“अरे, तुम दोनों फिर लड़ रहे हो?”
लेकिन जिंदगी हर किसी को दूसरा मौका नहीं देती।
एक राखी… जो कभी नहीं बंध पाई
एक भाई हर साल अपनी बहन से राखी बंधवाता था।
हर राखी पर बहन उससे कहती—
“भैया, इस बार मेरे लिए क्या लाए हो?”
भाई हँसकर कहता—
“पहले राखी बाँध, फिर बताऊँगा।”
बहन राखी बाँधती…
भाई मिठाई खिलाता…
और फिर दोनों बचपन की तरह लड़ने लगते।
एक साल भाई काम के सिलसिले में शहर से बाहर था।
बहन ने फोन करके कहा—
“भैया, इस बार राखी पर जरूर आना…
इस बार कुछ नहीं चाहिए, बस तुम्हें राखी बाँधनी है।”
भाई ने हँसते हुए कहा—
“पगली, तेरी राखी के लिए नहीं आऊँगा तो किसके लिए आऊँगा?”
लेकिन उस साल भाई नहीं पहुँच पाया।
रास्ते में उसका एक्सीडेंट हो गया।
घर में खबर पहुँची…
बहन दरवाजे पर खड़ी थी।
हाथ में राखी थी।
आँखों में इंतजार था।
लेकिन जिस भाई की कलाई पर राखी बाँधनी थी,
वह हमेशा के लिए चला गया।
उस दिन पहली बार उसे समझ आया कि
कुछ इंतजार जिंदगी में कभी खत्म नहीं होते।
अगले साल राखी आई।
घर में सब कुछ वैसा ही था…
मिठाई भी थी,
राखी भी थी,
लेकिन भाई नहीं था।
बहन ने राखी हाथ में ली और भाई की तस्वीर के सामने बैठ गई।
काँपते हाथों से राखी तस्वीर के पास रखकर बोली—
“भैया… इस बार भी देर कर दी तुमने।
मैं फिर राखी लेकर बैठी हूँ…
लेकिन तुम फिर नहीं आए।”
और फिर उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
उस दिन उसकी कलाई खाली थी…
लेकिन उससे भी ज्यादा खाली था उसका दिल।
हम अक्सर कहते हैं—
“मेरे बहुत सारे दोस्त हैं।”
लेकिन जिंदगी के किसी मोड़ पर जब सब साथ छोड़ देते हैं,
तब हमें याद आता है कि
एक भाई का फोन कितना कीमती था…
एक बहन की डाँट कितनी प्यारी थी…
और राखी के दिन कलाई पर बंधा वो धागा
कितना अनमोल था।
दोस्त आपके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं,
भाई-बहन आपकी बचपन की तस्वीरों में पहले से मौजूद होते हैं।
दोस्त आपकी कहानी का हिस्सा बनते हैं,
भाई-बहन आपकी कहानी की शुरुआत होते हैं।
इसलिए अगर आपकी कलाई पर
इस बार फ्रेंडशिप बैंड कम हैं तो कोई बात नहीं…
बस राखी के दिन कलाई खाली मत रहने देना।
किसी बहन का हाथ आपकी कलाई तक पहुँचे,
कोई भाई आपके सिर पर हाथ रखे,
कोई कहे—
“भैया, हमेशा खुश रहना…”
या कोई भाई बहन से कहे—
“जब तक मैं हूँ, तुझे किसी चीज की चिंता नहीं।”
यकीन मानिए…
उससे बड़ा कोई उपहार नहीं।
क्योंकि एक दिन ऐसा भी आता है
जब राखी खरीदने के लिए पैसे होते हैं,
मिठाई खरीदने के लिए पैसे होते हैं,
महंगे तोहफे खरीदने के लिए भी पैसे होते हैं…
लेकिन…
राखी बाँधने वाला हाथ नहीं होता।
और उस दिन इंसान दुनिया की सारी दौलत देकर भी
बस एक बार सुनना चाहता है—
“भैया…”
या बस एक बार कहना चाहता है—
“बहन, राखी बाँध दे…”
लेकिन वक्त वापस नहीं आता।
इसलिए जिनके भाई-बहन आज आपके पास हैं,
उनसे छोटी-छोटी बातों पर नाराज़ मत रहिए।
उनके फोन को कभी सिर्फ इसलिए मत काटिए कि
“बाद में बात कर लेंगे…”
क्योंकि कभी-कभी वो “बाद में”
पूरी जिंदगी का सबसे बड़ा पछतावा बन जाता है।
इस राखी पर महंगा तोहफा मत देखिए…
बस अपने भाई या बहन को देखिए।
कलाई पर बंधे उस धागे को देखिए…
और दिल से कहिए—
“तू मेरे पास है…
बस यही मेरी सबसे बड़ी खुशकिस्मती है।”
क्योंकि…
**फ्रेंडशिप बैंड चाहे कम हों,
लेकिन राखियों से हाथ भरे होने चाहिए…**
कलाई पर धागे कम हों तो भी चलेगा,
बस उस धागे को बाँधने वाला अपना होना चाहिए।
और अगर इस बार आपकी कलाई पर राखी बाँधने वाला कोई अपना नहीं है…
तो उसकी तस्वीर के सामने एक दिया जला देना…
शायद आसमान के उस पार से
वो भी मुस्कुराकर कह रहा हो—
“भैया… मैं आज भी तुम्हारे साथ हूँ।” 🥺❤️
रिश्ते जब पास हों, तब उनकी कद्र कर लेना…
क्योंकि कुछ रिश्ते छूट जाएँ तो
उन्हें वापस बुलाने के लिए
पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाती है। ❤️
Maine bhi apna bhai khoye h ek bahut miss karti hu usko.