ख्वाबों का नशा… और मंज़िल का होश
“ख्वाबों का नशा किए इंसान को मंज़िल पर ही होश आता है…” कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें आँखें बंद...
“ख्वाबों का नशा किए इंसान को मंज़िल पर ही होश आता है…” कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें आँखें बंद...
कभी-कभी जिंदगी हमें किसी सुनसान घाट की उस सीढ़ी पर लाकर बैठा देती है, जहाँ आसपास बहुत लोग होते हैं…लेकिन...
आजकल दोस्त बहुत हैं… मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सैकड़ों नाम हैं,सोशल मीडिया पर हजारों मित्र हैं,हर खुशी में तस्वीर...
कभी-कभी इंसान अकेलेपन से डरता है।उसे लगता है कि कोई उसका अपना हो… कोई उसके साथ बैठकर दो बातें कर...
“कृष्ण कौन हैं?” क्या वे केवल सिर पर मोरपंख सजाए, होंठों पर बाँसुरी रखे हुए ग्वालबालों के सखा हैं?क्या वे...
कभी सोचा है… जिस इंसान से हम सबसे ज्यादा नफरत करते हैं,शायद वही इंसान हमें जीवन का सबसे बड़ा सबक...
या माफ़ी माँग लो, या माफ़ कर दो रिश्तों में दरार हमेशा किसी बड़ी गलती से नहीं आती।कभी-कभी एक छोटा-सा...
आजकल शादी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि“पति-पत्नी एक-दूसरे से कितना प्यार करते हैं?” सवाल यह है—...
कभी किसी पुरुष से पूछिए— “आप कौन हैं?” वह अपना नाम बताएगा, अपना पद बताएगा, अपना परिवार बताएगा। लेकिन अगर...
कभी-कभी सोचता हूँ…इंसान की जिंदगी में रिश्ते कितने होते हैं। खून के रिश्ते,घर के रिश्ते,समाज के रिश्ते…और फिर एक रिश्ता...