माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह
माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह?(कविता )ज्योति स्वामी, बीकानेर, राजस्थान माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह,स्वतंत्रता सूं हमेशा भलो नीं...
माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह?(कविता )ज्योति स्वामी, बीकानेर, राजस्थान माणखां थाणे क्यूँ स्वतंत्रता री चाह,स्वतंत्रता सूं हमेशा भलो नीं...
देह पर नेह की शेष कुछ तो निशानी होती है।पारिजात से सुन्दर मेरे पिया, देह परनेह की शेष कुछ तो...