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Relation

धोखा किसने दिया?

By Unknown Writer
August 4, 2026 4 Min Read
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“कभी-कभी रिश्ते खत्म नहीं होते… बस एक इंसान उन्हें निभाता रहता है और दूसरा उन्हें छोड़ देता है।”

कहते हैं कि सच्चा प्यार किस्मत वालों को मिलता है।

लेकिन शायद यह भी सच है कि जिसे सबसे सच्चा प्यार मिलता है, उसकी किस्मत अक्सर सबसे ज़्यादा बेरहम होती है।

यह कहानी भी ऐसी ही एक मोहब्बत की है…

तीन साल…

पूरे 1095 दिन…

न जाने कितनी सुबहें, कितनी शामें, कितनी रातें…

न जाने कितने सपने…

न जाने कितने वादे…

और न जाने कितनी बार एक-दूसरे के लिए रोना, हँसना, लड़ना और फिर उसी पल एक-दूसरे की बाँहों में लौट आना।

उनका रिश्ता सिर्फ़ प्रेम नहीं था…

वह एक-दूसरे की आदत बन चुके थे।

लड़की कहती थी—

“अगर एक दिन भी तुमसे बात न हो तो लगता है जैसे साँस लेना भूल गई हूँ।”

और लड़का मुस्कुराकर कहता—

“जिस दिन तू साथ छोड़ देगी, उस दिन शायद मेरी धड़कन भी साथ छोड़ देगी।”

दोनों को यकीन था…

मौत आ सकती है… लेकिन जुदाई नहीं।

उन्हें क्या पता था…

कि कई बार मौत से भी ज़्यादा दर्दनाक होती है…

ज़िंदा रहते हुए किसी अपने को किसी और का होते देखना।


एक दिन…

दरवाज़े पर दस्तक हुई।

लड़के ने दरवाज़ा खोला।

सामने लड़की के माँ-बाप खड़े थे।

चेहरे पर गुस्सा नहीं…

थकान थी…

आँखों में आँसू थे…

और हाथ जुड़े हुए थे।

उन्होंने काँपती हुई आवाज़ में कहा—

“बेटा… हमारी बेटी तुम्हारी वजह से शादी नहीं कर रही। उसके कारण हमारे बेटे की भी शादी नहीं हो पा रही। हम तुमसे हाथ जोड़ते हैं… हमारी बेटी को छोड़ दो।”

इतना कहकर…

एक पिता…

जिसके आगे दुनिया सिर झुकाती है…

वह एक अनजान लड़के के सामने रो पड़ा।

उस पल…

लड़के का दिल जैसे किसी ने नाखूनों से नोच दिया।

वह चाहता तो कह सकता था—

“मैं उससे प्यार करता हूँ… मैं उसे नहीं छोड़ूँगा।”

लेकिन उसने ऐसा नहीं कहा।

क्योंकि प्यार में जीतना नहीं…

कभी-कभी हार जाना भी पड़ता है।

उसने बस इतना कहा—

“मैं उससे दूर हो जाऊँगा… लेकिन मुझे पूरा यकीन है… वह किसी और की कभी नहीं होगी।”

उसे अपनी मोहब्बत पर इतना भरोसा था…

कि उसे भगवान से भी ज़्यादा उस लड़की के वादों पर विश्वास था।


उस दिन के बाद…

उसने खुद को बदलना शुरू कर दिया।

जिस लड़की के मैसेज आते ही चेहरा खिल जाता था…

अब उन्हीं मैसेजों का जवाब घंटों बाद देता।

जिसकी एक मिस्ड कॉल पर दस बार फोन करता था…

अब जानबूझकर फोन नहीं उठाता।

हर बार जब वह लड़की रोकर पूछती—

“क्या हुआ है? तुम बदल क्यों गए?”

वह मुस्कुराकर कह देता—

“कुछ नहीं…”

लेकिन फोन कटने के बाद…

तकिया आँसुओं से भीग जाता।

क्योंकि वह उसे छोड़ नहीं रहा था…

वह उसे उसके परिवार को लौटा रहा था।


समय बीत गया।

एक दिन उसे पता चला…

लड़की ने किसी और लड़के से शादी के लिए “हाँ” कह दी।

पहले तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ।

उसने सोचा—

“मेरी पागल… ऐसा कभी नहीं कर सकती।”

लेकिन सच…

हमेशा विश्वास से बड़ा होता है।

सबसे ज़्यादा दर्द उसे तब हुआ…

जब पता चला…

जिस दिन वह अपने होने वाले पति से पहली बार मिली…

उसी शाम…

वह उससे भी मिली थी।

वह उसके सामने बैठी…

हँसती रही…

बातें करती रही…

उसकी आँखों में देखकर मुस्कुराती रही…

लेकिन एक बार भी नहीं बोली—

“आज मैं किसी और की होने जा रही हूँ।”

उस दिन…

वह लड़का उसकी आँखों में अपना कल ढूँढ रहा था…

और वह लड़की…

उसी आँखों में अपने बीते हुए कल को हमेशा के लिए दफ़ना रही थी।


दिन गुजरते रहे।

दोनों की बातें होती रहीं।

उधर शादी की खरीदारी चल रही थी…

इधर लड़का भविष्य के सपने बुन रहा था।

उसे आज भी भरोसा था—

“नहीं… आख़िरी समय पर वह ज़रूर लौट आएगी।”

लेकिन…

आख़िरी समय आया…

लौटी नहीं।


उस रात…

लड़के ने फोन किया।

बस उसकी आवाज़ सुननी थी।

उसने कहा—

“मुझे तुमसे बात करनी है… मुझे तुम्हारी ज़रूरत है…”

उधर से जवाब आया—

“कल मेरी शादी है… मैं मेहँदी लगवा रही हूँ।”

बस…

इतने शब्द थे।

लेकिन इन शब्दों ने…

तीन साल की मोहब्बत…

हज़ारों यादें…

लाखों सपने…

एक ही पल में मार दिए।

उसे याद आया…

कभी यही हाथ उसकी हथेलियों में होते थे।

आज…

उन्हीं हाथों पर…

किसी और के नाम की मेहँदी गहरी होती जा रही थी।

उसने एक बार नहीं…

दो बार नहीं…

पूरे 200 बार फोन किया।

हर बार…

रिंग गई।

हर बार…

कॉल काट दी गई।

शायद…

नया रिश्ता पुराने रिश्ते की आख़िरी साँसें सुनना नहीं चाहता था।


सुबह हो गई।

आज उसकी शादी थी।

फिर भी…

उस लड़के ने आख़िरी उम्मीद नहीं छोड़ी।

उसने काँपती आवाज़ में कहा—

“अगर तू मजबूरी में शादी कर रही है… तो बस एक मैं तुझे आख़िरी बार देखना चाहता हूँ..

उधर से जवाब आया—

“मेरे पास टाइम नहीं है… मुझे तैयार होना है… तुम्हें जो सोचना है सोचो।”

फोन कट गया।

लेकिन इस बार…

सिर्फ़ कॉल नहीं कटी।

तीन साल का रिश्ता कट गया।

एक ज़िंदगी कट गई।

एक इंसान भीतर से टूटकर बिखर गया।


जब बारात आई होगी…

सब लोग खुश होंगे…

ढोल बजे होंगे…

शहनाइयाँ गूँजी होंगी…

लड़की दुल्हन बनी होगी…

सब उसकी मुस्कान देख रहे होंगे।

लेकिन…

शायद उसी समय…

किसी कमरे में…

एक लड़का…

उसकी पुरानी तस्वीरों को सीने से लगाकर…

रोते-रोते…….

उसने पहली बार महसूस किया होगा…

कि इंसान की मौत तब नहीं होती…

जब उसकी साँसें रुकती हैं…

इंसान तब मर जाता है, जब जिसके लिए वह जी रहा हो… वह किसी और का हो जाए।


आज भी…

जब कभी मेहँदी की खुशबू आती होगी…

वह मुस्कुरा नहीं पाता होगा।

क्योंकि उसे याद आ जाता होगा…

कि इसी खुशबू ने…

उसकी पूरी दुनिया उससे छीन ली थी।


अब आप ही बताइए…

धोखा किसने दिया?

उस लड़के ने…

जिसने उसके परिवार की खुशियों के लिए खुद को मिटा दिया…

या उस लड़की ने…

जिसने आख़िरी पल तक उसे उम्मीदों में ज़िंदा रखा…

और फिर एक दिन सिर्फ़ इतना कहा—

“मेरे पास टाइम नहीं है…”


कुछ ज़ख्म कभी नहीं भरते…

क्योंकि उन्हें समय नहीं…

किसी अपने की चुप्पी देती है।

और याद रखिए…

मोहब्बत में बिछड़ जाना धोखा नहीं होता…

लेकिन किसी को आख़िरी साँस तक झूठी उम्मीदों में ज़िंदा रखना… सबसे बड़ा धोखा होता है।

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Unknown Writer

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