दोष को अस्त कर दे, उसी को दोस्त कहा गया है

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A True Friend Is Someone Who Removes Your Flaws

आजकल दोस्त बहुत हैं…

मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट में सैकड़ों नाम हैं,
सोशल मीडिया पर हजारों मित्र हैं,
हर खुशी में तस्वीर खिंचवाने वाले भी बहुत हैं…

लेकिन जब जिंदगी हमें आईना दिखाती है,
तब पता चलता है कि दोस्त कितने हैं और सिर्फ जान-पहचान वाले कितने।

क्योंकि दोस्त वह नहीं,
जो आपकी हर बात पर कहे—
“तू बिल्कुल सही है।”

दोस्त तो वह है जो आपकी आँखों में देखकर कह सके—
“नहीं दोस्त… यहाँ तुम गलत हो।”

और यह कहने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए।


एक आदमी ने अपने दोस्त से कहा—

“तुम हमेशा मेरी गलतियाँ क्यों निकालते रहते हो?
जब बाकी लोग मेरी तारीफ करते हैं,
तुम मुझे मेरी कमियाँ क्यों बताते हो?”

दोस्त मुस्कुराया और बोला—

“क्योंकि बाकी लोग तुम्हें खुश देखना चाहते हैं,
लेकिन मैं तुम्हें बेहतर देखना चाहता हूँ।”

बस यही अंतर होता है
भीड़ और दोस्त में।

भीड़ आपकी तालियाँ बजाती है,
दोस्त आपकी गलतियों पर आपको रोकता है।

भीड़ आपके गिरने का इंतजार करती है,
दोस्त गिरने से पहले आपका हाथ पकड़ लेता है।


सच्चा दोस्त आपकी बुराई दुनिया के सामने नहीं करता।

वह आपको अकेले में बैठाकर कहता है—

“देख दोस्त…
तुम्हारे भीतर बहुत अच्छाई है,
बस यह एक आदत तुम्हें अंदर से कमजोर कर रही है।”

उसकी बात शायद उस समय बुरी लगे,
दिल भी दुखे…

लेकिन कुछ समय बाद जब उसी दोस्त की बात समझ आती है,
तो मन कहता है—

“काश! दुनिया में हर किसी को ऐसा दोस्त मिले।”

क्योंकि सच्चा दोस्त आपकी तारीफ करके
आपके अहंकार को नहीं बढ़ाता,

बल्कि आपकी कमियों को मिटाकर
आपके व्यक्तित्व को बड़ा बनाता है।


कभी-कभी जिंदगी में ऐसा समय भी आता है
जब हम गलत होते हैं,
लेकिन हमें यह दिखाई नहीं देता।

हम अपने गुस्से को सही समझते हैं,
अपनी जिद को आत्मसम्मान समझते हैं,
अपनी गलती को मजबूरी बताते हैं
और अपने अहंकार को सिद्धांत का नाम दे देते हैं।

उस समय अगर कोई अपना
हमारा हाथ पकड़कर कह दे—

“रुक जा…
तू यहाँ गलत जा रहा है।”

तो उस इंसान को खोना नहीं चाहिए।

क्योंकि हर कोई हमें खुश करने वाला मिल जाएगा,
लेकिन हर कोई हमें सही करने वाला नहीं मिलेगा।


सच्चा दोस्त वह है
जो आपकी गैरमौजूदगी में भी आपकी इज्जत बचाए।

जो आपके राज को राज रखे।

जो आपकी कमजोरी को हथियार न बनाए।

जो आपकी सफलता से जलने के बजाय
आपसे भी ज्यादा खुश हो।

और जब आप सफलता के नशे में
अपने ही लोगों को भूलने लगें,
तो आपको आईना दिखाकर कहे—

“दोस्त… जमीन मत भूलना,
क्योंकि आसमान पर पहुँचने के बाद भी
इंसान को लौटकर जमीन पर ही आना पड़ता है।”

ऐसे दोस्त जिंदगी की दौलत होते हैं।


कभी-कभी दोस्त हमारी जिंदगी में
भगवान की तरह आते हैं।

वे हमें वह नहीं देते जो हम चाहते हैं,
वे हमें वह बताते हैं
जो हमारे लिए जरूरी होता है।

उनकी डाँट में भी अपनापन होता है,
उनकी नाराजगी में भी चिंता होती है,
उनकी चुप्पी में भी दर्द होता है
और उनकी सलाह में हमारा भविष्य छिपा होता है।

ऐसे दोस्त को उसकी कड़वी बातों के कारण मत खो देना।

क्योंकि मीठा बोलने वाले बहुत मिलेंगे,
लेकिन कड़वा सच बोलकर बचाने वाला शायद एक ही मिलेगा।


याद रखिए…

जो आपकी गलती देखकर भी चुप रहे,
वह आपका साथी हो सकता है।

जो आपकी गलती पर आपका मजाक उड़ाए,
वह आपका परिचित हो सकता है।

जो आपकी गलती को दुनिया में बताए,
वह आपका आलोचक हो सकता है।

लेकिन…

जो आपकी गलती को आपसे दूर कर दे,
आपके दोष को अस्त कर दे,
आपके भीतर की अच्छाई को जगा दे—
उसी को सच्चा दोस्त कहा गया है।

क्योंकि दोस्त वह नहीं
जो सिर्फ आपके साथ खड़ा दिखाई दे…

दोस्त वह है
जो आपको गलत रास्ते से वापस लाकर
सही रास्ते पर खड़ा कर दे।

और जिंदगी में अगर ऐसा एक दोस्त भी मिल जाए,

तो समझ लेना…

आपने जिंदगी में बहुत कुछ पा लिया है।

क्योंकि कुछ रिश्ते खून से नहीं बनते,
वे सच, विश्वास और निस्वार्थ प्रेम से बनते हैं।

और ऐसे रिश्ते उम्रभर दिल में रहते हैं।

दोष को अस्त कर दे,
उसी को दोस्त कहा गया है।
❤️

1 thought on “दोष को अस्त कर दे, उसी को दोस्त कहा गया है

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